‘ जीवन से लम्बे ये जीवन के रस्ते …….’ ‘दो राहों  में बँट गए ये जीवन के रस्ते ‘…. ‘आशीर्वाद ‘ फिल्म का यह गाना बहुत ही सुंदर  और आज भी उतना ही मधुर लगता है। गाने की इन दो पंक्तियाँ हमेशा वहीँ पर दो पल ठहरने को मजबूर कर देती हैं।क्या है इन पंक्तियों में ? जीवन का दर्शन , सच्चाई तो है ही इसमे लेकिन और भी कुछ है जो सोचने को बाध्य कर देता है …..। क्या है वह ? रास्ते और राहें इन दो शब्दों में किया गया अंतर बहुत मोहित करता है। देखा जाए तो इन शब्दों का शब्दकोशीय अर्थ एक ही है लेकिन गाने की इन पंक्तियों में इस एक ही अर्थ के दो पहलुओं को इतनी बारीकी से और सुंदरता से अलगाया गया है कि देखते ही बनता है।यहाँ रास्ते का मतलब है  – आम , फैले हुए , बेमतलब , जिनकी कोई मंज़िल नहीं , जिन पर सिर्फ निरुद्देश भटका जाता है , जो इतस्तत: फैले रहते हैं। और राह से मतलब है जिस पर चलकर कोई मंज़िल हासिल की जाती है , जो तयशुदा समय पर , जगह पर पहुँचती है, जिस  पर सोद्देश्य चला जाता है। यहाँ पहली पंक्ति आम , सामान्य रास्तों की बात करती है और दूसरी पंक्ति इन्हीं रास्तों में से किन्हीं ऐसे दो रास्तों की बात करती है जो रास्ते विशेष उद्देश्य से चुने गए हैं और जिनकी  अपनी कोई मंज़िल है और इसी लिए रास्तों की भीड़ में  से निकलकर ‘ राह ‘ बन गए हैं।

अर्थों की इतनी बारीकियां दिखानेवाली ये पंक्तियाँ और ये शब्द इसी लिए कुछ पल ठहरकर सोचने को और उससे प्राप्त आनंद पाने को बाध्य करते हैं।
क्या कभी आप को भी ऐसे किसी सामान्य – से लगनेवाले शब्द ने ऐसा मोहित किया है ? और आनंद दिया है ?