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शब्द वही फिर भी भावनाएँ,अर्थ खो क्यों गए हैं ?

इन दिनों भाषा को लेकर इतने झमेले हो गए हैं कि भाषा के माध्यम से अपने मन की भावना, बात ,विचार दूसरे  तक पहुँचाना शायद हम भूल गए हैं। भाषा के द्वारा दूसरे के मन की बात , भावना समझना तो और ही भूल गए हैं। कहा जाता हैं कि बिना कुछ कहे भी सामने वाले के मन [...]

जीवन अनुभव के दो पहलू

अमृता प्रीतम की रचना पर आधारित  ' पिंजर ' फिल्म में एक गाना है - ' हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छूटा करते ' यह सुनते समय  कई साल पहले देखी फिल्म  ' थोड़ी सी बेवफाई ' का गाना ' आज बिछड़े हैं कल का डर भी नहीं ' अचानक याद आया। दोनों गाने बिल्कुल विरोधी या एक [...]

जीवन से लम्बे ये जीवन के रस्ते

' जीवन से लम्बे ये जीवन के रस्ते .......' 'दो राहों  में बँट गए ये जीवन के रस्ते '.... 'आशीर्वाद ' फिल्म का यह गाना बहुत ही सुंदर  और आज भी उतना ही मधुर लगता है। गाने की इन दो पंक्तियाँ हमेशा वहीँ पर दो पल ठहरने को मजबूर कर देती हैं।क्या है इन पंक्तियों में [...]